विश्व एड्स दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन।
ब्यूरो, नरेंद्रनगर।
__________________
विश्व एड्स दिवस के अवसर पर धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय नरेंद्र नगर में एड्स जागरूकता दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस आयोजन में रेड रिबन इकाई, यूथ रेड क्रॉस क्लब एवं राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई ने जिला एड्स नियंत्रण समिति टिहरी गढ़वाल के सहयोग से भाग लिया।
सोमवार को कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्रभारी प्राचार्य डॉ. उमेश चन्द्र मैठाणी ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि एड्स बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर गंभीर बीमारियों का जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है, और एचआईवी का बढ़ता संक्रमण स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण है।
संयुक्त चिकित्सालय के प्रेम लाल टम्टा ने कहा कि एड्स से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने बताया कि सुरखा क्लीनिक एवं एकीकृत परामर्श एवं जांच केन्द्रों पर कई तरह की जांच किटों के माध्यम से उपचार एवं दवा उपलब्ध हैं।
एड्स नियंत्रण के क्षेत्र में 15 वर्षों का अनुभव रखने वाले गिरीश जोशी ने एड्स फैलने के कारण, निवारण एवं रोकथाम के साथ ही बचाव एवं सुरक्षा पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर एचआईवी संक्रमण की रोकथाम के लिए व्यापक अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप इस संक्रमण के फैलने की गति को भी नियंत्रित करने में मदद मिली है। उन्होंने एड्स के आंकड़ों को प्रदर्शित करते हुए बताया कि देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंहनगर एवं नैनीताल में सबसे ज्यादा एड्स पीड़ित पाए गए, जबकि बागेश्वर जिले में एक भी केस दर्ज नहीं है।
रेड क्रॉस यूनिट के संयोजक डॉ. संजय महर ने कहा कि एड्स जैसी बीमारी के बचाव एवं सुरक्षा चक्र में मानवीय पहलुओं को बढ़ावा दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के विश्व एड्स दिवस की थीम “एड्स हेतु व्यवधान पर विजय एवं एड्स प्रत्युत्तर में सुधार” इस बात को प्रदर्शित करती है कि एड्स बीमारी से ग्रसित लोगों का मनोबल बढ़ाकर इस बीमारी से लड़ा जा सकता है।
रेड रिबन क्लब के संयोजक डॉ मनोज फोन्दणी ने एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमें एड्स पीड़ितों के प्रति सहानुभूति और समर्थन दिखाना चाहिए।
डॉ. अमित केसरवानी ने कहा कि एचआईवी का संक्रमण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे रोगी के लिए बीमारियों से मुकाबला करना कठिन हो जाता है। एड्स को लाइलाज बीमारी माना जाता था, लेकिन वैज्ञानिक शोध और कारगर दवाओं ने इसके इलाज को आसान बना दिया है।
बताया कि अमित केसरवानी ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य एड्स नियंत्रण समिति एवं जिला एड्स नियंत्रण समिति मिलकर एड्स से बचाव एवं जागरूकता अभियान चला रही है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को एड्स के प्रति जागरूक करना और इसके बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी देना है।
इस दौरान रेड क्रॉस की सह-संयोजिका लक्ष्मी कठैत, डॉ विक्रम बर्त्वाल, डॉ कमल बिष्ट, डॉ हिमांशु जोशी, डॉ सृचना सचदेवा, डॉ राजपाल, डॉ सुशील, नताशा, शिशुपाल सिंह, अजय पुण्डीर, शांति बिजल्वाण आफिया, आयुषी, निर्मल, सुनीता मौजूद रहें।



