विकसित भारत 2047: सूझबूझ से काम करने का आह्वान
– कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने दिया विकसित भारत का मंत्र
– विकसित भारत के लिए सूझबूझ जरूरी: मंत्री
– ए आई और सोशल मीडिया के दौर में विकसित भारत के लिए सूझबूझ से काम करना होगा
ब्यूरो,नरेंद्रनगर।
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राजकीय महाविद्यालय नरेंद्र नगर में ‘विजन फार विकसित भारत 2047’ पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर से लगभग 300 प्रतिनिधियों ने हाइब्रिड मोड में अपनी प्रतिभागिता के लिए नामांकन किया है।

वृहस्पतिवार को मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्मृति चिन्ह साल एवं प्लांटर भेंट कर स्वागत किया गया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया के दौर में विकसित भारत के लिए हमें सूझबूझ से काम करना होगा, तथा विकास के प्रमुख लक्ष्यों में संस्कृति,शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में लक्ष्य निर्धारित करने होंगे इसके मूल में समरसता की संस्कृति को मजबूती प्रदान करना होगा,जिससे विकसित भारत का सपना साकार हो सके।

नोट स्पीकर के रूप में फोर्ट वैली स्टेट यूनिवर्सिटी यूएसए के प्रोफेसर निर्मल जोशी ने पावलाउनिया ट्री पर किए गए अपने शोध के अनुसार उसे कल्पतरू की संज्ञा दी है। उन्होंने इस पेड़ को इमारती लकड़ी,जलाऊ लकड़ी, वाद्य यंत्र को निर्मित किए जाने, औषधि गुणों के अलावा एथेनॉल का एक अच्छा स्रोत बताया। जोशी ने कहा कि उत्तराखंड में भी ऐसे कई कल्पतरू हैं, जो राज्य की आर्थिकी के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

प्रतिष्ठित अतिथि वक्ता के रूप में गुरुग्राम विश्वविद्यालय हरियाणा के कुलपति प्रो.संजय कौशिक ने विकसित भारत के लिए देश के स्वास्थ्य पैरामीटर पर कार्य करने के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर कार्य किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय देहरादून के कुलपति प्रो. जी एस रजवार ने विकसित भारत के लिए सतत विकास के साथ पर्यावरणीय क्षय को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाएं बनाये जाने की वकालत की। दून विश्वविद्यालय के प्रबंधन संकाय के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर एच सी पुरोहित ने विकसित भारत के लिए गरीब,महिला, युवा एवं किसानों के साथ गैर पारंपरिक ऊर्जा के क्षेत्र में कार्य किए जाने को आवश्यक बताया।
काशीपुर पीजी कॉलेज की प्राचार्य प्रो. सुमिता श्रीवास्तव ने ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी को विकसित भारत के लिए आवश्यक बताया। एनएनएसएस समुल्खा ग्रुप के प्रोफेसर राजेश गोयल ने कहा की बहू ध्रुवीय विश्व में हमें अपने विकास सूचकांक बनाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि इसका हल पावर आफ कंपाउंडिंग से होगा।
पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक एन पी माहेश्वरी ने ट्रांसपोर्टेशन कास्ट को विकसित भारत के लिए कम किए जाने की आवश्यकता बताई। चंडीगढ़ से आए प्रोफेसर मुकेश तिवारी ने मानव शक्ति के सही उपयोग की दिशा में कार्य किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की प्रो. सुरेखा ने राणा ने वैल्यू एजुकेशन और ह्यूमन केयरिंग को विकास के लिए आवश्यक बताया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की शोध छात्रा विशैल ने भारत के सांस्कृतिक पक्ष को इसकी ताकत बताया।
इससे पूर्व कॉलेज प्राचार्य प्रोफेसर प्रणितानंद ने अपने स्वागत उद्बोधन में सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए सभी से विकसित भारत के लिए कार्य करने का आह्वान किया। इस अवसर पर एक स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
इस दौरान डॉ संजय कुमार, डॉ संजय मेहर, पूर्व प्राचार्य प्रो. जानकी पवार और श्री देव सुमन विश्वविद्यालय परिसर ऋषिकेश के निदेशक प्रोफेसर एम एस रावत विशेष रूप से मौजूद रहे।



