मणिकूट पर नवमी-यज्ञ संपन्न,गूंजे जय-घोष
13वें ज्योतिर्लिंग के दर्शन को उमड़ी श्रद्धालु-भीड़
हरिओम महाराज: मणिकूट—शिव-शक्ति का शुद्ध-सिद्ध पीठ
राम प्रसाद पाल बोले एक दर्शन से 12 ज्योतिर्लिंग का पुण्य
ऋषिकेश /मणिकूट पर्वत।
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चैत्र नवरात्रि की नवमी के पावन दिन मणिकूट पर्वत पर स्थित मां त्रिपुरा शिव-शक्ति धाम में भव्य अनुष्ठान हुआ। श्री 1008 हरिओम महाराज के सान्निध्य में सुबह से वेद-मंत्रों के बीच यज्ञ चला, दोपहर को पूर्ण आहुति के साथ विधि संपन्न हुई। देश भर से पहुंचे श्रद्धालुओ ने स्थापित त्रयोदश (13वें) ज्योतिर्लिंग और मां के गर्भगृह के दर्शन किए।
सभा को संबोधित करते हुए महाराज ने कहा कि मणिकूट विश्व के सर्वाधिक शुद्ध-सिद्ध पीठों में से है,जहां शिव और शक्ति साकार विराजते हैं। उन्होंने यज्ञ को पंचतत्वों के संतुलन की कुंजी बताया—अग्नि को मेरुदंड मानते हुए कहा कि हवन की ज्वाला के साथ प्रकृति स्वयं लय में आ जाती है और समस्त देवताओं का वास होता है। पूर्ण आहुति के बाद उन्होंने सभी परिवारों के लिए सुरक्षा, व्यवस्था और समृद्धि की मंगल-कामना की।
महाराज ने घोषणा की कि पिछली शिवरात्रि को विशेष प्रतिष्ठा हुई थी, और आगामी शिवरात्रि को पुराण-वर्णित वैभव के साथ और भव्य रूप में मनाया जाएगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि त्रिपुरा विधानसभा के उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री राम प्रसाद पाल ने कहा—_“अब तक 12 ज्योतिर्लिंगों का दर्शन नहीं कर पाया था; त्रयोदश शिवलिंग के दर्शन से वही पुण्य प्राप्त कर धन्य हुआ।”_ पर्वत पर “मणिकूट धाम की जय” के गगनभेदी उद्घोष और शंख-ध्वनि से पूरा क्षेत्र देर तक गुंजायमान रहा।



