“हमारा काम सुनवाई और समाधान है, प्रचार नहीं”, मर्यादा-गोपनीयता प्राथमिक, सार्वजनिक प्रसारण नहीं: कुसुम कंडवाल
ब्यूरो, ऋषिकेश।
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उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने सोशल मीडिया पर फैली भ्रामक टिप्पणियों कि शिकायत के बाद आयोग ने कुछ नहीं किया का कड़ा खंडन किया और ऋषिकेश के एक पारिवारिक प्रकरण में अब तक की गई पूरी कार्यवाही बताई।
मामला: 6 फ़रवरी 2026 को पंजीकृत। पीड़िता ने परिवार पर मारपीट, प्रॉपर्टी डीलिंग और जबरन देहव्यापार कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए।
प्रारंभिक कार्रवाई: आयोग ने तुरंत संज्ञान लिया। 24 फ़रवरी 2026 को दोनों पक्षों को काउंसलिंग के लिए बुलाया; शिकायतकर्ता आईं, विपक्षी पक्ष अनुपस्थित रहा, इसलिए काउंसलिंग पूरी नहीं हुई।
जांच निर्देश: शिकायतकर्ता की सहमति से आयोग ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (देहरादून) को निष्पक्ष-गहन जांच के लिए पत्र भेजा, 16 अप्रैल 2026 तक रिपोर्ट मांगी। जांच चल रही है; रिपोर्ट मिलने पर साक्ष्यों के आधार पर कठोर विधिक कार्रवाई तय होगी। यदि मामला अदालत में विचाराधीन है, तो आयोग हस्तक्षेप नहीं करेगा, पर शिकायतकर्ता रिपोर्ट की प्रति माँग सकती है।
आयोग की नीति (अध्यक्ष का स्पष्टीकरण):
-आयोग स्वयं किसी पारिवारिक/निजी विवाद को सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर प्रसारित नहीं करता।
– प्राथमिक लक्ष्य: पीड़ित महिला को न्याय दिलाना + परिवार की निजता-मर्यादा की रक्षा, ताकि सुलह/सुधार की संभावना बनी रहे।
– आयोग सिर्फ़ उन्हीं प्रकरणों में आधिकारिक जानकारी देता है जो पहले से मीडिया में सार्वजनिक हो चुके हों ( संज्ञान की स्थिति स्पष्ट करने के लिए)। शिकायतकर्ता/संबंधित पक्ष के सार्वजनिक होने से पहले आयोग आधिकारिक वक्तव्य नहीं देता; पक्षों द्वारा जानकारी सार्वजनिक करने पर ही आयोग अपनी कार्रवाई का विवरण देता है।
अध्यक्ष का संदेश: आयोग प्रदेश की पीड़ित महिलाओं का ‘सशक्त कवच’ है, विधिक प्रक्रिया व साक्ष्यों पर कार्य करता है। बिना जाँच रिपोर्ट एकपक्षीय कार्रवाई अन्यायपूर्ण है। भ्रामक पोस्ट विधिक प्रक्रिया में बाधा हैं—नागरिक अर्ध-सत्य/अफ़वाहों पर भरोसा न करें।



