“महाशिवरात्रि पर उमड़ा आध्यात्मिक उल्लास, 290 से अधिक ने किया राजयोग ध्यान”
ब्यूरो, ऋषिकेश।
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महाशिवरात्रि का पावन पर्व प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, गीता नगर, ऋषिकेश केंद्र में 8 फ़रवरी को मनाया गया। इस दिवस को शिव जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकि यह दिन निराकार परमपिता शिव के अवतरण का स्मृति दिवस माना जाता है।
सब ज़ोन इंचार्ज बीके मंजू दीदी ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया गया।
दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का हुआ आगाज, मेयर शंभू पासवान और बीके मंजू दीदी ने संयुक्त रूप से जलाए दीप।
महंत रवि शास्त्री ने बधाई दी, कहा- धर्म को कभी नहीं भूलना चाहिए, परमात्मा का सुमिरन ही है साथ जाने वाली धरोहर।
स्वामी शिवानंद महाराज ने कहा, सुख-दुःख नियति का हिस्सा, परमात्मा को देखने के लिए हटाना होगा अहंकार का पर्दा।
बीके मंजू दीदी ने कहा, महाशिवरात्रि आत्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का पर्व है। शिव हैं ज्योति बिंदु स्वरूप, सर्वशक्तिमान परमपिता। अगर हम एक अच्छी बात अपना लें तो मन शान्त और चरित्र उज्जवल हो जाएगा। सुख देने का संकल्प लें, सृष्टि देव तुल्य बन जाएगी।
बीके मंजू दीदी ने कहा, संगठन में अपार शक्ति होती है, यह संस्था परिवारों को जोड़ने और पवित्र बनाने का कार्य कर रही है। नए भवन के निर्माण में सभी का योगदान सराहनीय है। शत-प्रतिशत शुद्ध और सच्चे संकल्प सदैव पूर्ण होते हैं।
बीके आरती दीदी ने शिवरात्रि के आध्यात्मिक रहस्यों को स्पष्ट किया, कहा- शिवलिंग पर चढ़ाने का अर्थ है बुराइयों और विकारों का त्याग। जल अर्पण मन की शुद्धता, दूध पवित्रता और शांति, बेलपत्र तीन गुणों पर विजय, धतूरा विकारों को त्यागने का प्रतीक है। क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और ईर्ष्या जैसे दोषों का त्याग कर दिव्य गुण धारण करने का आह्वान किया।
बीके सुशील भाई ने किया कार्यक्रम का संचालन, 290 से अधिक भाई-बहनों ने राजयोग ध्यान का अभ्यास कर पाया शांति और आध्यात्मिक अनुभूति। कार्यक्रम का समापन विश्व शांति के संकल्प के साथ हुआ, नवनिर्मित भवन के मेडिटेशन हाल का भी हुआ उद्घाटन।
इस दौरान स्वामी रामेश्वर गिरी महाराज, स्वामी रघुवीर गिरी महाराज, योगीराज योगी आशुतोष महाराज, स्वामी शिवानन्द महाराज, स्वामी आलोक हरिहर गिरी मौजूद रहें।



