May 15, 2026

ऋषिकेश: दो महीने से लापता नाबालिग को पुलिस के सकुशल रेस्क्यू करने पर आयोग की अध्यक्ष ने दी बधाई

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ऋषिकेश। 2 महीने से लापता किशोरी को पुलिस ने रेस्क्यू करने पर उत्तराखंड महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने पुलिस को बधाई दी।

आपको बता दे कि बीते दिनों शिवाजीनगर से लगभग 17 वर्ष की नाबालिग किशोरी के दो माह पूर्व को अचानक कहीं चले जाने का मामला सामने आने पर परिजनों ने थाने में रिपोर्ट कराई थी। जिस पर पुलिस ने छानबीन शुरू करी थी। परंतु किशोरी के पास मोबाइल न होने के कारण उसकी जानकारी मिलपाना अत्यंत कठिन हो गया था जानकारी न मिलने के पश्चात परिजनों द्वारा उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी गई। जिस पर महिला आयोग के अध्यक्ष ने मानव तस्करी को रोकने के लिए काम कर रही संस्था ह्यूमन राइट काउंसिल के राजेंद्र पँवार के साथ स्वयं ऋषिकेश कोतवाली पहुंच कर जल्द से जल्द किशोरी को ढूंढने के लिए निर्देशित किया था तथा सभी संदिग्धों को जांच के दायरे में लेते हुए कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे।

मामले में आयोग की अध्यक्ष लगातार पुलिस से जानकारी लेती रही जिस पर एसओ ऋषिकेश आज फोन पर जानकारी दी कि कुछ दिन के पूर्व किशोरी को कॉल में बात करने के बाद उस की लोकेशन ट्रेस की गई जिसे मेरठ से रेस्क्यू कर लिया गया।

जिस पर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने पुलिस के अधिकारियों को व पूरी टीम को बधाई देते हुआ कहा कि ऐसे मामले बढ़ने लगे है जिस पर अंकुश लगाना अत्यंत आवश्यक है। पुलिस को ऐसे प्रकरणों में तत्काल जांच व कार्यवाही करनी चाहिये तथा युवतियों के भागने या गायब हो जाने वाले इन मामलों में सहयोग करने वालो के विरुद्ध भी एक्शन लेना चाहिए।

हालांकि पुलिस की जानकारी के अनुसार लड़की लगभग 17 वर्ष 6 माह की है तथा उसने घर से जाने के पश्चात शादी कर ली है। जो कि अपने घर जाने से इनकार कर रही है जिसे अभी बालिग होने तक नारी निकेतन में रखा जाएगा।

महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि मेरी सभी माता पिता से अपील है की अपने बच्चों को अपने मित्र की भांति व्यवहार करें तथा उनकी मोनिटरिंग अवश्य करें की हमारे बच्चे किस संगत में है तथा किस किस से कितनी कितनी देर बात कर रहे है क्योंकि इस उम्र में ऐसी घटनाओं के घटने की संभावना अधिक बढ़ जाती है इसी लिए हमे अपनी युवा पीढ़ी को मित्र रूप में रखकर अपने संस्कारों व अपनी जड़ों से जोड़कर रखना चाहिए।

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