May 12, 2026

परीक्षा परिणाम में सालों से झेल रहे हैं त्रुटि

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ऋषिकेश। पंडित ललित मोहन शर्मा श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय परिसर में छात्र- छात्राओं की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इससे छात्र-छात्राओं में आक्रोश है। श्री देव सुमन परिसर बने 6वर्ष पूरे होने वाले हैं। लेकिन परीक्षा परिणाम में सुधार नहीं है। परिसर की गलती को जबरदस्ती छात्रों पर थोपा जा रहा है। जिससे छात्रसंघ पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय को चेतावनी दी है

मंगलवार को बीएड कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित प्रेस वार्ता में  छात्रसंघ अध्यक्ष हिमांशु जाटव ने बताया कि कॉलेज की विश्वविद्यालय परिसर बने लगभग 6 वर्ष पूरे होने वाले है और अभी तक परीक्षा परिणामों में हो रही त्रुटि के लिए कोई सुविधा छात्र छात्राओं के लिए नहीं दी गई है। लगातार छात्रसंघ ने परीक्षा परिणाम को लेकर कई बार परिसर के कुलपति को ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया गया है। लेकिन अभी तक इस कार्य में कोई सुधार नहीं है। सारी ग़लतिया छात्र छात्राओं पर थोपा जा रहा है। जबकि ये त्रुटि परिसर के ऑनलाइन पोर्टल व ग़लत सीख की वजह से हो रही है। बताया कि बीते दिन स्नातक पंचम सेमेस्टर के ऑनलाइन परिणाम प्रकाशित किया गया है। उसमे भी कई छात्र छात्राओं की अनुपस्थित और कई छात्र छात्राओं के नंबर ही नहीं चढ़ाये गए है इस तरह की कई सारी गलतियां परिसर की ओर से  लगातार दोहराई जा रही है। जिसका समाधान अभी तक नहीं हुआ है ।

छात्रसंघ सचिव माधवेन्द्र मिश्रा ने बताया कि विश्वविद्यालय की त्रुटियो की वजह से छात्र छात्राओं को कई बार टिहरी जाना पड़ता है। जबकि विश्वविद्यालय को बनाने के बाद सारी समस्याओं का समाधान विश्वविद्यालय परिसर ऋषिकेश में ही होना चाहिए। ताकि छात्र छात्राओं को किसी भी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े।  बताया कि विश्वविद्यालय में जब तक परीक्षा परिणाम की समस्या का समाधान ऋषिकेश परिसर से नहीं होगा तब तक छात्र छात्राओं को ऐसे ही इधर उधर भटकना पड़ेगा और लगातार इस तरह की त्रुटियो की सजा छात्र छात्राओं को भुगतनी पड़ेगी।

छात्रसंघ उपाध्यक्ष निहारिका ने बताया कि विश्वविद्यालय ऋषिकेश परिसर में परीक्षा परिणामों को लेकर इतनी गलतियां है कि उसका शिकार मुझे ख़ुद भी होना पड़ा है।  बीते दिन आए बी०ए० पंचम सेमेस्टर की ऑनलाइन परिणामों में मेरा भी परिणाम आया और मुझे बहुत हेरानी हुई कि मेरा जियोग्राफी विषय में बहुत ही कम नंबर मुझे मिला है। निहारिका ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर को परीक्षा के विषय में बहुत ज़्यादा विचार करना चाहिए ताकि छात्र छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ ना किया जा सके।

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