हरेला पर्व पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश: पेड़ काटें नहीं, बचाएं
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ऋषिकेश। हरेला पर्व केवल पौधरोपण का उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प भी है। इसी संदेश को साकार करते हुए मायाकुंड स्थित भगवान गिरी आश्रम में भूपेंद्र गिरी महाराज ने निर्माण कार्य के दौरान बीच में आ रहे बेल और नीम के हरे-भरे वृक्षों को काटने के बजाय वैज्ञानिक तकनीक वृक्ष प्रत्यारोपण के माध्यम से सुरक्षित नया जीवन दिया।
आश्रम परिसर में भवन निर्माण के दौरान जब वृक्ष बाधा बन रहे थे, तब उन्हें हटाने के लिए आरी नहीं चलाई गई। सबसे पहले पेड़ों की लॉपिंग कर पानी के वाष्पीकरण को कम किया गया। इसके बाद कई दिनों तक जड़ों में नियमित पानी देकर उन्हें प्रत्यारोपण के लिए तैयार किया गया। फिर जेसीबी की सहायता से पूरे रूट बॉल के साथ वृक्षों को सावधानीपूर्वक उखाड़कर परिसर में ही उपयुक्त स्थान पर दोबारा रोपित किया गया।
भूपेंद्र गिरी महाराज ने बताया कि लगातार हो रही बारिश और उचित देखभाल के कारण दोनों वृक्ष नई जगह पर फिर से जीवन पा रहे हैं। उनमें नई हरियाली दिखाई देने लगी है और उम्मीद है कि एक वर्ष के भीतर वे अपने पुराने स्वरूप में विकसित हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि आज शहरों में विकास के नाम पर सबसे पहले पेड़ों की बलि दी जाती है, जबकि आधुनिक तकनीक के माध्यम से अधिकांश वृक्षों को सुरक्षित स्थानांतरित किया जा सकता है। यदि हर निर्माण कार्य में वृक्षों को बचाने की ऐसी सोच अपनाई जाए तो विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।
हरेला पर्व का सबसे बड़ा संदेश यही है कि पेड़ हमारी धरोहर हैं। उन्हें काटना नहीं, बचाना हमारी जिम्मेदारी है। जब एक आश्रम निर्माण के बीच आए वृक्षों को नया जीवन दे सकता है, तो समाज भी प्रकृति के प्रति ऐसी संवेदनशील सोच अपनाकर हरियाली को सुरक्षित रख सकता है।



