टिहरी पीएसपी: भारत का पहला वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज प्लांट जल्द होगा तैयार,ऊर्जा की होगी बचत।
– प्लांट बिजली की मांग के अनुसार अपनी गति को बदल सकता है।
– ऊर्जा की बचत होगी और बिजली की आपूर्ति में होगा सुधार।
– भारत का पहला वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज प्लांट: टीएचडीसी का 1000 मेगावाट का टिहरी पीएसपी कमीशनिंग के आखिरी चरण में पहुंचा।
ब्यूरो,ऋषिकेश।
टिहरी पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट भारत की ऊर्जा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है। यह प्लांट बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करेगी, जिससे ऊर्जा की स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।। यह प्लांट 1000 मेगावाट की क्षमता वाला है और इसकी चार यूनिट्स में से दो पहले से ही काम कर रही हैं। बाकी दो यूनिट्स जल्द ही शुरू होने वाली हैं। यह प्लांट उत्तरी ग्रिड में बिजली की मांग को पूरा करने में मदद करेगा और ऊर्जा की बचत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बता दे कि टिहरी पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट (पीएसपी) एक विशेष प्रकार का बिजली संयंत्र है जो पानी को दो जलाशयों के बीच पंप करके बिजली बनाता है। यह संयंत्र मौजूदा टिहरी और कोटेश्वर जलाशयों का उपयोग करता है, जो इसके ऊपरी और निचले बेसिन हैं।जब बिजली की मांग कम होती है, तो यह संयंत्र निचले जलाशय से पानी को ऊपरी जलाशय में पंप करता है। जब बिजली की मांग बढ़ती है, तो यह पानी को नीचे टरबाइन के माध्यम से छोड़कर बिजली उत्पन्न करता है।
यह मॉडल बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, और यह प्रणाली प्रचालक को लोड बैलेंस करने, फ्रीक्वेंसी को स्थिर करने और शाम की पीक डिमांड की पूर्ति करने के लिए एक भरोसेमंद प्रणाली उत्पन्न करता है।
भागीरथी नदी के बाएं किनारे पर स्थित भूमिगत विद्युत गृह में प्रत्येक 250-मे.वा. क्षमता के साथ चार रिवर्सिबल यूनिट है, यह परियोजना लगभग 90 मीटर के हेड वेरिएशन वाले हाई-हेड ऑपरेशन के लिए परिकल्पित की गई है। एक बार पूरी तरह से कमीशन होने के पश्चात टिहरी पीएसपी 1000 मे.वा. की पीकिंग विद्युत उत्पादित करेगा एवं मौजूदा टिहरी और कोटेश्वर संयंत्र के साथ, पीएसपी के पूरा होने से टिहरी हाइड्रो पावर कॉम्प्लेक्स की कुल क्षमता 2,400 मे.वा. हो जाएगी।
आखिरी यूनिट पर कार्य शेड्यूल के अनुसार आगे बढ़ रहा है, कार्य प्रगति के अनुसार यह परियोजना कमीशनिंग के करीब है, यह एक ऐसी उपलब्धि है जो अवश्य ही विद्युत क्षेत्र के विशेलेषको, नीति निर्माता एवं ग्रिड नियोजकों का ध्यान खींचेगी। जैसे-जैसे भारत की नवीकरणीय क्षमता में वृद्धि हो रही है, टिहरी पीएसपी को जैसे ग्रिड- बैलेंसिंग एसेट्स को ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर देखा जा रहा है। शेष यूनिटों की फ़ाइनल कमीशनिंग से न सिर्फ़ एक तकनीकी रूप से जटिल परियोजना पूर्ण होगी, बल्कि विद्युत प्रणाली में बदलाव को व्यवस्थित करने की देश की क्षमता में भी बहुत अधिक वृद्धि होगी।



