आखिर कब पटरी पर लौटेगी ऋषिकेश की यातायात व्यवस्था?
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संपादक,
कब पटरी पर लौटेगी ऋषिकेश की यातायात व्यवस्था
तीर्थ नगरी ऋषिकेश आज केवल चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों का प्रमुख केंद्र भी है। लेकिन जिस शहर की पहचान आध्यात्मिक शांति और सुव्यवस्थित व्यवस्था से होनी चाहिए, वहां की यातायात व्यवस्था दिन-प्रतिदिन बदहाल होती जा रही है।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम अब सामान्य बात बन चुका है, लेकिन चिंता का विषय यह है कि शहर की आंतरिक गलियां भी वाहनों के दबाव से कराह रही हैं। बिना योजना के संचालित ई-रिक्शा, बाहरी राज्यों के वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही और सड़कों पर फैला अतिक्रमण मिलकर हालात को और गंभीर बना रहे हैं। कई स्थानों पर वाहन चालक नियमों की अनदेखी करते हुए जाम के बीच ही वाहन घुसा देते हैं, जिससे कुछ मिनटों का जाम घंटों की परेशानी में बदल जाता है।
जयराम आश्रम मार्ग इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। एक ओर सड़क पर अतिक्रमण और दूसरी ओर बेलगाम ई-रिक्शा संचालन ने इस मार्ग को स्थायी जाम का केंद्र बना दिया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि समस्या सबके सामने होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देती। यदि नियमों का पालन कराने वाली एजेंसियां केवल बैठकों और योजनाओं तक सीमित रहेंगी, तो सड़क पर स्थिति कैसे सुधरेगी?
यातायात व्यवस्था केवल चालान काटने से नहीं सुधरती। इसके लिए अतिक्रमण हटाने, ई-रिक्शाओं के लिए निर्धारित रूट तय करने, पार्किंग व्यवस्था मजबूत करने और नियमों का समान रूप से पालन कराने की आवश्यकता है। प्रशासन, नगर निगम और यातायात पुलिस को संयुक्त रूप से मैदान में उतरकर नियमित अभियान चलाने होंगे।
ऋषिकेश की पहचान उसकी आध्यात्मिक गरिमा और पर्यटन से जुड़ी है। यदि शहर में आने वाला श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक रोजाना जाम, अव्यवस्था और अराजक यातायात से जूझता रहेगा, तो यह शहर की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। अब समय आ गया है कि बैठकों से आगे बढ़कर धरातल पर ठोस और सख्त कार्रवाई की जाए।



