“मृतक देह कुछ नहीं खोती, नेत्रदान से मिले किसी को ज्योति”।
ब्यूरो, ऋषिकेश।
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चंद्रमोहनी के मृत्योपरांत कराए गए नेत्रदान से किसी की अंधेरी जिंदगी में रोशनी अवश्य आएगी।
स्वर्गाश्रम जोंकग्राम निवासी 81वर्षीय चंद्रमोहनी के निधन पर उनकी पुत्री मीनू ने मां के नेत्रदान की इच्छा का प्रिंस धर्मेश मनचंदा को सूचना दी।
जिनके सूचना पर नेत्रदान कार्यकर्ता व लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के चार्टर अध्यक्ष गोपाल नारंग ने बताया कि ऋषिकेश नेत्र बैंक एम्स हॉस्पिटल की डॉक्टर कामना वर्मा व संदीप गुसाईं की टीम को उनके निवास पर ले जाकर दोनों कॉर्निया सुरक्षित प्राप्त कर लिए।
लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के कोषाध्यक्ष जगदीश चचरा ने बताया कि नेत्र दान मिशन का 417वां सफल प्रयास है ,जो अविरल चलता रहेगा।
इस दौरान पूर्व मंडलाध्यक्ष लायन संजय चोपड़ा, प्रेम तुली , शेर सिंह राजपूत, दिनेश अग्रवाल, कपिल गुप्ता, संजय तुली, अनिल कक्कड़ ने परिवार को धन्यवाद किया।



